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कितनी गजब की बात है खाना सभी को चाहिए मगर अन्न कोई उपजाना नही चाहता, पानी सभी को चाहिए लेकिन तालाब कोई खोदना नही चाहता। पानी के महत्त्व को समझे। और आवश्यकता अनुसार पानी का इस्तेमाल करे।
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29 July 2016

महाश्‍वेता देवी, स्‍मृति शेष : थम गई आभासीय लेखन के बीच यथार्थ रचती एक सच्‍ची कलम…!

Mahasweta Vermaउनका जाना साहित्‍य के भीतर कागज और जमीन के बीच किए गए हर उस काम का अचानक से थम जाना है, जहां एक लेखक होने का अर्थ होता है,  सामाजिक कार्यकर्ता हो जाना। वे थीं इसका अर्थ था कि जब भी आप कलम उठाएं, तो पहले जमीन पर होने वाले बदलाव के प्रति भी उतने ही प्रतिबद्ध रहें।दरअसल, आपके सामने महाश्‍वेता देवी का होना लेखन करने और लेखक होने की प्रतिबद्धता के प्रति मन में निष्‍ठा को जीना था। लिखने, गुनने और लिखे हुए के लिए जमीन पर उतरकर कार्य करने का साहस महाश्‍वेता देवी हो जाना था। अब चूंकि वे हमारे बीच नहीं हैंं, और हम वर्चुअल स्‍पेस में कलम दौड़ाने वालों के बीच नकली लेखकों की दुनिया में हैं, तो ऐसे में हमारे बीच से महाश्‍वेता देवी का जाना हमारे समय और समाज में बहुत कुछ थम जाने की तरह ही है।

15 July 2016

भाव पक्ष और कला पक्ष

             कविता का सीधा सम्बन्ध हृदय से होता है। कविता में कही गई बात का असर तेज और स्थायी होता है। कविता के दो पक्ष होते हैं। आन्तरिक यानि भाव पक्ष और बाह्य यानि कला पक्ष। सर्वप्रथम कला पक्ष पर विचार करें। कविता को मर्मस्पर्शी बनाने में सार्थक ध्वनि समूह का बड़ा महत्व है। विषय को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने में शब्दार्थ योजना का बड़ा महत्व है। शब्दों का चयन कविता के बाहरी रूप को पूर्ण और आकर्षक बनाता है। कवि की कल्पना शब्दों के सार्थक और उचित प्रयोग द्वारा ही साकार होती है। अपनी हृदयगत भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए कवि भाषा की अनेक प्रकार से योजना करता है ओर इस प्रकार प्रभावशाली कविता रचता है। शब्द शक्ति, शब्द गुण, अलंकार लय तुक छंद, रस, चित्रात्मक भाषा इन सबके सहारे कविता का सौंदर्य संसार आकार ग्रहण करता है। लय और तुक कविता को सहज गति और प्रवाह प्रदान करते हैं। लयात्मकता कविता को संगीतमय और गेय बनाती है जिससे कविता आत्मा के तारों को झंकृत कर अलौंकिक आनन्द प्रदान करती है। कविता में तुक का भी अपना एक अलग स्थान हैं जब किसी छन्द के दो चरणों के अन्त में अत्न्यानुप्रास आता है तो उसे तुक कहा जाता है जिसके कारण कविता में माधुर्य और प्रभाव बढ़ जाता है।

അഭിമന്യു

മഹാഭാരതത്തിലെ ഒരുദുരന്തകഥാപാത്രമാണ് അഭിമന്യു  പാണ്ഡവനായ അർജ്ജുനന് ശ്രീകൃഷ്ണ സഹോദരിയായ സുഭദ്രയിൽ ജനിച്ച മകനാണ് ഇദ്ദേഹം. ചന്ദ്രന്റെ അംശാവതാരമായി വിശേഷിപ്പിക്കുന്ന അഭിമന്യുവിനെ അച്ഛനോളം പോന്ന വില്ലാളിയായാണ് മഹാഭാരതത്തിൽ ചിത്രീകരിച്ചിരിക്കുന്നത്.

11 July 2016

हिन्दी के उपसर्ग

1अभाव, निषेधअछूता, अथाह, अटल
2अनअभाव, निषेधअनमोल, अनबन, अनपढ़
3कुबुराकुचाल, कुचैला, कुचक्र
4दुकम, बुरादुबला, दुलारा, दुधारू
5निकमीनिगोड़ा, निडर, निहत्था, निकम्मा
6हीन, निषेधऔगुन, औघर, औसर, औसान
7भरपूराभरपेट, भरपूर, भरसक, भरमार
8सुअच्छासुडौल, सुजान, सुघड़, सुफल
9अधआधाअधपका, अधकच्चा, अधमरा, अधकचरा
10उनएक कमउनतीस, उनसठ, उनहत्तर, उंतालीस
11परदूसरा, बाद कापरलोक, परोपकार, परसर्ग, परहित
12बिनबिना, निषेधबिनब्याहा, बिनबादल, बिनपाए, बिनजाने

कृत् प्रत्यय

वे प्रत्यय जो धातु में जोड़े जाते हैं, कृत प्रत्यय कहलाते हैं। कृत् प्रत्यय से बने शब्द कृदंत (कृत्+अंत) शब्द कहलाते हैं। जैसे- लेख् + अक = लेखक। यहाँ अक कृत् प्रत्यय है, तथा लेखक कृदंत शब्द है।
क्रमप्रत्ययमूल शब्द\धातुउदाहरण
1अकलेख्, पाठ्, कृ, गैलेखक, पाठक, कारक, गायक
2अनपाल्, सह्, ने, चर्पालन, सहन, नयन, चरण
3अनाघट्, तुल्, वंद्, विद्घटना, तुलना, वन्दना, वेदना
4अनीयमान्, रम्, दृश्, पूज्, श्रुमाननीय, रमणीय, दर्शनीय, पूजनीय, श्रवणीय
5सूख, भूल, जाग, पूज, इष्, भिक्ष्सूखा, भूला, जागा, पूजा, इच्छा, भिक्षा
6आईलड़, सिल, पढ़, चढ़लड़ाई, सिलाई, पढ़ाई, चढ़ाई
7आनउड़, मिल, दौड़उड़ान, मिलान, दौड़ान
8हर, गिर, दशरथ, मालाहरि, गिरि, दाशरथि, माली
9इयाछल, जड़, बढ़, घटछलिया, जड़िया, बढ़िया, घटिया
10इतपठ, व्यथा, फल, पुष्पपठित, व्यथित, फलित, पुष्पित
11इत्रचर्, पो, खन्चरित्र, पवित्र, खनित्र
12इयलअड़, मर, सड़अड़ियल, मरियल, सड़ियल
13हँस, बोल, त्यज्, रेतहँसी, बोली, त्यागी, रेती
14उकइच्छ्, भिक्ष्इच्छुक, भिक्षुक
15तव्यकृ, वच्कर्तव्य, वक्तव्य
16ताआ, जा, बह, मर, गाआता, जाता, बहता, मरता, गाता
17तिअ, प्री, शक्, भजअति, प्रीति, शक्ति, भक्ति
18तेजा, खाजाते, खाते
19त्रअन्य, सर्व, अस्अन्यत्र, सर्वत्र, अस्त्र
20क्रंद, वंद, मंद, खिद्, बेल, लेक्रंदन, वंदन, मंदन, खिन्न, बेलन, लेन
21नापढ़, लिख, बेल, गापढ़ना, लिखना, बेलना, गाना
22दा, धादाम, धाम
23 ,गद्, पद्, कृ, पंडित, पश्चात्, दंत्, ओष्ठ्गद्य, पद्य, कृत्य, पाण्डित्य, पाश्चात्य, दंत्य, ओष्ठ्य
24यामृग, विद्मृगया, विद्या
25रूगेगेरू
26वालादेना, आना, पढ़नादेनेवाला, आनेवाला, पढ़नेवाला
27ऐया\वैयारख, बच, डाँट\गा, खारखैया, बचैया, डटैया, गवैया, खवैया
28हारहोना, रखना, खेवनाहोनहार, रखनहार, खेवनहार

05 June 2016

2016 जून 5 पर्यावरण दिवस- प्रतिज्ञा

2016 जून 5 पर्यावरण दिवस
प्रतिज्ञा
      पर्यावरण, जंगल, जंगली जानवर, झीलें, नदियाँ आदि का संरक्षण मेरा दायित्व है। सारे जीवजंतुओं से मैं सहानुभूति प्रकट करूँगा। अगर जंगल और जंगली जानवरों के विरुद्ध कोई अत्याचार मेरी जानकारी में आये तो मैं जंगल के अधिकारियों के ध्यान में खींच लूँगा। पर्यावरण, जंगल, जंगली जानवर, झीलें आदि के संरक्षण के साथ मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि जंगली जानवरों से प्रास किसी भी अवैध उपज का इस्तेमाल कभी नहीं करूँगा।

21 April 2016

बीरबहूटी TM

अपना परिचय देते हुए टिप्पणी तैयार करें।
·       “दोस्ती की यादें”
·       नाम, कक्षा और स्कूल
·       माता-पिता, पेशा
·       भाई-बहन
·       प्राथमिक विद्यालय
·       पहली कक्षाध्यापिका
·       प्राथमिक स्कूल के साथी-साथिन
·       दोस्ती की यादें।

27 March 2016

दम तोड़ती रिश्ते के बीच की उलझी हुई डोर की कहानी 'आपका बंटी'

पुस्तक  - आपका बंटी
लेखिका - मन्नू भंडारी
आपका बंटी मन्नू भंडारी के उन बेजोड़ उपन्यासों में है जिनके बिना न बीसवीं शताब्दी के हिन्दी उपन्यास की बात की जा सकती हैन स्त्री-विमर्श को सही धरातल पर समझा जा सकता है। दजर्नों संस्करण और अनुवादों का यह सिलसिला आज भी वैसा ही है जैसा धमर्युग में पहली बार धारावाहिक के रूप में प्रकाशन के दौरान था। बच्चे की निगाहों और घायल होती संवेदना की निगाहों से देखी गई परिवार की यह दुनिया एक भयावह दुस्वप्न बन जाती है। कहना मुश्किल है कि यह कहानी बालक बंटी की है या माँ शकुन की और अजय-शकुन के बिखरे रिश्ते की। सभी तो एक-दूसरे में ऐसे उलझे हैं कि त्रासदी सभी की यातना बन जाती है। शकुन के जीवन का सत्य है कि स्त्री की जायज महत्वाकांक्षा और आत्मनिर्भरता पुरुष के लिए चुनौती है-नतीजे में दाम्पत्य तनाव से उसे अलगाव तक ला छोड़ता है। यह शकुन का नहींसमाज में निरन्तर अपनी जगह बनातीफैलाती और अपना कद बढ़ाती हर स्त्री का है। पति-पत्नी के इस द्वन्द में यहाँ भी वही सबसे अधिक पीसा जाता है जो नितान्त निर्दोषनिरीह और असुरक्षित है-बंटी। बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ-बूझ के लिए चर्चित, प्रशंसित इस उपन्यास का हर पृष्ठ ही मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक है। हिन्दी उपन्यास की एक मूल्यवान उपलब्धि के रूप में आपका बंटी एक कालजयी उपन्यास है

24 March 2016

14 March 2016

പത്താം ക്ലാസ് ഹിന്ദി

പാഠപുസ്തകങ്ങള്സ്കൂളുകളില് എത്തി. പാഠഭാഗങ്ങളുടെ വിശകലനം സോപാന് ആരംഭിക്കുന്നു. ആദ്യമായി ചോദിക്കട്ടേ. പുസ്തകം ലഭ്യമായോ. വില നിശ്ചയിച്ചു കൊണ്ടുള്ള സര്ക്കുലര്   വരാത്തതു കൊണ്ട് ചില സൊസൈറ്റികളിലെങ്കിലും വില്പന തുടങ്ങിയിട്ടില്ല.
പത്താം ക്ലാസ് ഹിന്ദി
ആകെ അഞ്ചു യൂണിറ്റുകള്
കഥ, കുറിപ്പ്, കവിത, നോവല്, ഓര്മകുറിപ്പ്, ജീവചരിത്രം, സിനിമാഗാനം, ലേഖനം, യാത്രാ വിവരണം ചേര്ത്ത് 16 പാഠഭാഗങ്ങള്. 
കേട്ടതും വായിച്ചതും പഠിച്ചതും പഠിപ്പിച്ചതും തുടങ്ങി കൊച്ചു പുസ്തകത്തില് നിന്നു പോലും ഹണ്ടിംഗ് കാണാം.

बसंत मेरे गाँव का

बसंत मेरे गाँव का - बसंत के इस मौसम में हिमालय की तराई में बसंत का स्वागत अनोखे तरीके से होता है। बच्चों के लिए बसंत फूलदेई त्यौहार की सौगात लेकर आता है। नरगिस के सुन्दर चित्र फूलदेई की एक झलक देने की कोशिश करते हैं।

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ठाकुर का कुआँ -प्रेमचंद


जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है !
गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी । कुआँ दूर था, बार-बार जाना मुश्किल था । कल वह पानी लायी, तो उसमें बू बिलकुल न थी, आज पानी में बदबू कैसी ! लोटा नाक से लगाया, तो सचमुच बदबू थी । जरुर कोई जानवर कुएँ में गिरकर मर गया होगा, मगर दूसरा पानी आवे कहाँ से?

नीली आसमानी छतरी



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